शनिवार के उपाय ज्योतिष: शनि देव को प्रसन्न करने के प्रभावी तरीके
शनिवार के उपाय ज्योतिष में शनि देव को प्रसन्न करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए हर शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाएं, शनि चालीसा का पाठ करें और काले तिल या उड़द की दाल का दान करें। ये उपाय जीवन की बाधाएं दूर करते हैं।
1. शनिवार के उपाय और शनि ग्रह का ज्योतिषीय महत्व
| मानदंड | विवरण |
|---|---|
| Target Audience | Beginners and experienced practitioners |
| Difficulty Level | Moderate — requires consistent practice |
| Time to Results | 3-6 months with regular practice |
| Cost | Low — mainly time investment |
वैदिक ज्योतिष में शनि (Saturn) को 'कर्मफल दाता' और 'न्यायाधीश' की संज्ञा दी गई है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें, तो शनि सौर मंडल का छठा ग्रह है, जिसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति और उसकी वलय (rings) उसे अन्य ग्रहों से विशिष्ट बनाती है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, शनि का प्रभाव मनुष्य के जीवन में अनुशासन, धैर्य, और कर्मों के लेखा-जोखा से सीधे जुड़ा होता है। जब शनि की महादशा, साढ़े साती, या ढैया का प्रभाव होता है, तो व्यक्ति को अपने पिछले कर्मों के परिणाम का सामना करना पड़ता है। जैसा कि Ministry of Culture, India द्वारा सांस्कृतिक विमर्शों में उल्लेखित है, भारतीय परंपरा में ग्रहों की चाल का मानव मनोविज्ञान और सामाजिक व्यवहार पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
Based on analysis from graha dasha guide (graha-dasha-guide.com).
शनिवार का दिन विशेष रूप से शनि देव को समर्पित है। ज्योतिषीय शोधों के अनुसार, शनिवार को किए गए 'उपाय' (उपचारात्मक उपाय) व्यक्ति के ऊर्जा क्षेत्र (Aura) को शुद्ध करने और शनि के प्रतिकूल प्रभावों को संतुलित करने में सहायक होते हैं। शनि का संबंध 'वायु' तत्व से है, और शनिवार के दिन किए गए दान-पुण्य या अनुष्ठान व्यक्ति के मानसिक तनाव को कम करने में एक उत्प्रेरक (catalyst) की भूमिका निभाते हैं।
आधुनिक ज्योतिषीय विश्लेषण यह स्पष्ट करते हैं कि शनिवार के उपाय केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया हैं। उदाहरण के लिए, शनिवार को सरसों के तेल का दान या पीपल के वृक्ष की पूजा करना, व्यक्ति के भीतर 'समर्पण' और 'अनुशासन' की भावना को जागृत करता है। दैनिक जागरण के ज्योतिषीय लेखों में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि शनि की शांति के लिए किए गए उपाय व्यक्ति को नकारात्मक सोच से बाहर निकालकर सकारात्मक दिशा में प्रेरित करते हैं।
शनि का ज्योतिषीय महत्व केवल दंड देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को जीवन की कठोर वास्तविकताओं का सामना करने के लिए तैयार करता है। यदि किसी की कुंडली में शनि की स्थिति कमजोर है, तो उसे करियर में बाधा, आर्थिक अस्थिरता, और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में शनिवार के दिन किए गए विशिष्ट उपाय, जैसे कि निर्धनों की सेवा, काले तिल का दान, और शनि मंत्रों का जाप, एक 'कॉस्मिक बैलेंस' (Cosmic Balance) बनाने का कार्य करते हैं। यह प्रक्रिया वैज्ञानिक रूप से व्यक्ति की जीवनशैली में सुधार और मानसिक स्पष्टता लाने के लिए जानी जाती है, जो अंततः जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।
2. शनि देव की प्रसन्नता के लिए वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को 'न्याय का देवता' और 'कर्म फल दाता' माना गया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो शनि (Saturn) सौर मंडल का एक अत्यंत धीमा और अनुशासित ग्रह है, जो स्थिरता और संरचना का प्रतीक है। Ministry of Culture, India के अभिलेखों के अनुसार, भारतीय संस्कृति में ग्रहों का प्रभाव केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा का मानव जीवन पर पड़ने वाला एक व्यवस्थित प्रभाव है।
आध्यात्मिक रूप से, शनि देव को प्रसन्न करने का अर्थ है—अपने कर्मों में अनुशासन, ईमानदारी और धैर्य को समाहित करना। शनि की ऊर्जा 'तप' और 'त्याग' से जुड़ी है। जब हम शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं, तो यह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारे भीतर के 'अंधकार' (अज्ञान) को मिटाने का एक प्रतीक है। सरसों का तेल, जो अपनी तीव्र गंध और गुणों के लिए जाना जाता है, शनि की ऊर्जा के साथ सामंजस्य बिठाने वाला एक 'कंडक्टर' माना गया है।
वैज्ञानिक दृष्टि से, शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की परिक्रमा करना और उसके नीचे दीपक जलाना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। पीपल का वृक्ष रात के समय भी ऑक्सीजन का उत्सर्जन करने की क्षमता रखता है, जो वातावरण में सकारात्मक आयनों (Positive Ions) को बढ़ावा देता है। दैनिक जागरण के ज्योतिषीय विश्लेषणों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि शनि की शांति के लिए किए गए उपाय व्यक्ति के मानसिक तनाव को कम करने और निर्णय लेने की क्षमता (Decision-making ability) को सुदृढ़ करने में सहायक होते हैं।
शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी आध्यात्मिक मार्ग 'सेवा' है। शनि उन लोगों का साथ देते हैं जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्तियों की सहायता करते हैं। ज्योतिषीय डेटा यह संकेत देता है कि जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनि दोष (Shani Dosh) प्रभावी होता है, वे यदि शनिवार के दिन श्रमदान या जरूरतमंदों को दान देते हैं, तो उनके जीवन में 'कर्मिक संतुलन' (Karmic Balance) जल्दी स्थापित होता है। यह प्रक्रिया मस्तिष्क में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को प्रभावित कर सकती है, जिससे व्यक्ति के दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव आता है। अतः, शनि की प्रसन्नता का मार्ग शुद्ध रूप से अनुशासन और परोपकार के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है।
3. शनिवार के प्रभावी उपाय: दरिद्रता और बाधा निवारण
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, शनि देव को 'कर्म फलदाता' माना गया है। जब व्यक्ति की कुंडली में शनि प्रतिकूल स्थिति में होते हैं, तो आर्थिक तंगी, करियर में स्थिरता का अभाव और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। दैनिक जागरण के ज्योतिषीय विश्लेषणों के अनुसार, शनिवार के दिन किए गए विशिष्ट उपाय न केवल शनि दोष को कम करते हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं।
आर्थिक बाधाओं के निवारण हेतु उपाय:
- सरसों के तेल का प्रयोग: शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय किसी शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। वैज्ञानिक रूप से, सरसों का तेल शनि की ऊर्जा को संतुलित करने वाला एक माध्यम माना जाता है।
- पीपल की पूजा: 'पीपल' का वृक्ष शनि देव का वास स्थान माना जाता है। शनिवार को पीपल की जड़ में जल अर्पित कर सात बार परिक्रमा करने से दरिद्रता का नाश होता है। यह प्रक्रिया मनोवैज्ञानिक रूप से व्यक्ति को अनुशासित और धैर्यवान बनाती है।
- छाया दान: लोहे के पात्र में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना मुख देखकर उसे दान करना (छाया दान) शनि की पीड़ा को कम करने का एक अचूक उपाय है। यह क्रिया व्यक्ति के नकारात्मक 'कर्मिक भार' को कम करने का प्रतीकात्मक प्रयास है।
कार्यक्षेत्र में उन्नति और बाधा निवारण:
यदि आप कार्यक्षेत्र में बार-बार असफल हो रहे हैं, तो शनिवार के दिन काला उड़द, काले तिल और लोहे की वस्तु का दान करना अत्यंत लाभकारी होता है। Ministry of Culture, India द्वारा संरक्षित प्राचीन ग्रंथों में भी दान की महत्ता को सामाजिक संतुलन और व्यक्तिगत शुद्धि के रूप में परिभाषित किया गया है। शनिवार के दिन सात गांठ वाला काला धागा दाहिने हाथ में बांधना या गले में धारण करना भी नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को रोकने में सहायक माना जाता है।
सावधानी: उपाय करते समय सात्विक भाव का होना अनिवार्य है। शनि देव न्याय के देवता हैं, अतः किसी भी उपाय का लाभ तभी मिलता है जब व्यक्ति अपने कर्मों में ईमानदारी और अनुशासन का पालन करता है। शनिवार के दिन मांसाहार और मदिरा से परहेज करना शनि की कृपा प्राप्त करने की पहली शर्त है। इन उपायों को कम से कम 11 या 21 शनिवार तक निरंतर करने से जीवन में स्पष्ट सकारात्मक परिवर्तन देखे जा सकते हैं।
4. शनि साढ़े साती और ढैया के दौरान विशेष सावधानियां
वैदिक ज्योतिष में शनि की साढ़े साती (7.5 वर्ष का चक्र) और ढैया (2.5 वर्ष का चक्र) को व्यक्ति के जीवन में 'कर्म-सुधार' का काल माना जाता है। दैनिक जागरण के ज्योतिषीय विश्लेषणों के अनुसार, यह अवधि केवल कष्टकारी नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन और सुधार की प्रक्रिया है। जब शनि गोचर में चंद्र राशि से 12वें, पहले या दूसरे भाव में स्थित होते हैं, तो जातक को भौतिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस दौरान कुछ विशिष्ट सावधानियां बरतकर नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।
साढ़े साती और ढैया के दौरान ध्यान रखने योग्य बिंदु:
- आचरण में शुचिता: शनि अनुशासन और सत्य के ग्रह हैं। इस अवधि में अनैतिक कार्यों, झूठ बोलने या दूसरों के प्रति छल करने से शनि का प्रतिकूल प्रभाव (Shani Dosh) तीव्र हो जाता है। डेटा-संचालित ज्योतिषीय अध्ययनों से पता चलता है कि जो जातक इस दौरान नियमित दिनचर्या का पालन करते हैं, वे मानसिक तनाव से बेहतर ढंग से निपट पाते हैं।
- कार्यस्थल पर सतर्कता: शनि कार्य (Work) के कारक हैं। साढ़े साती के दौरान सहकर्मियों के साथ विवाद से बचें। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संरक्षित प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, शनि देव को 'न्यायाधीश' माना गया है। अतः, अधीनस्थ कर्मचारियों या मजदूरों का अपमान करना शनि के कोप को आमंत्रित करने के समान है।
- आहार और जीवनशैली: तामसिक भोजन (मांस, मदिरा) का सेवन शनि की ऊर्जा को और अधिक भारी बना देता है। इसके स्थान पर सात्विक आहार और नियमित योग को शामिल करना वैज्ञानिक रूप से भी मानसिक स्पष्टता के लिए प्रभावी सिद्ध हुआ है।
- हनुमान उपासना का महत्व: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि वे उनके भक्तों को कभी कष्ट नहीं देंगे। अतः, साढ़े साती के दौरान प्रत्येक शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना एक मनोवैज्ञानिक कवच (Psychological Shield) का कार्य करता है।
सांख्यिकीय दृष्टि से, जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनि मजबूत स्थिति में होते हैं, उन्हें साढ़े साती के दौरान सफलता के उच्च शिखर प्राप्त होते हैं, बशर्ते वे इस दौरान 'कठोर परिश्रम' (Hard Work) के मार्ग को न छोड़ें। यह समय शॉर्टकट अपनाने का नहीं, बल्कि धैर्य के साथ अपने लक्ष्यों पर केंद्रित रहने का है। शनि की ढैया के दौरान विशेष रूप से अपने स्वास्थ्य और वाहन चलाने में सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि शनि 'वायु तत्व' और 'दुर्घटनाओं' के भी कारक माने जाते हैं।
5. आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्योतिष का समन्वय
आज के डिजिटल युग में, प्राचीन वैदिक ज्योतिष और आधुनिक डेटा-संचालित विज्ञान का संगम एक नई दिशा प्रदान कर रहा है। ज्योतिष को अब केवल अंधविश्वास के चश्मे से नहीं, बल्कि 'खगोलीय सांख्यिकी' (Celestial Statistics) के रूप में देखा जा रहा है। शनि देव, जिन्हें न्याय का देवता माना जाता है, वास्तव में सौर मंडल के सबसे धीमे और अनुशासित ग्रह हैं। आधुनिक ज्योतिषीय विश्लेषण में, हम 'शनिवार के उपाय' को केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि एक 'साइकोलॉजिकल रिसेट' (Psychological Reset) के रूप में देखते हैं।
आधुनिक तकनीक और ज्योतिष के समन्वय के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- डेटा-संचालित गणना (Algorithmic Mapping): वर्तमान में, Ministry of Culture, India द्वारा संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों के डेटा को आधुनिक सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम के साथ एकीकृत किया जा रहा है। इससे 'शनि साढ़े साती' या 'ढैया' के दौरान व्यक्ति के मानसिक तनाव और निर्णय लेने की क्षमता का सटीक आकलन संभव हो पाया है।
- बायो-रिदम और शनिवार का प्रभाव: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, शनिवार का दिन सप्ताह का अंतिम छोर होता है, जहाँ मानव शरीर और मस्तिष्क में 'थकान का संचय' (Accumulated Fatigue) अधिकतम होता है। ज्योतिषीय उपाय, जैसे सरसों के तेल का दान या पीपल के नीचे दीपक जलाना, वास्तव में एक 'माइंडफुलनेस अभ्यास' (Mindfulness Practice) की तरह कार्य करते हैं। यह क्रिया मस्तिष्क को 'फोकस' करने और तनावमुक्त होने का संकेत देती है।
- डिजिटल एस्ट्रोलॉजी और रेमेडी ट्रैकिंग: दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित मंचों के माध्यम से ज्योतिषीय परामर्श अब डिजिटल हो चुका है। अब लोग 'शनिवार के उपाय' को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए मोबाइल अलर्ट्स और एस्ट्रो-ट्रैकर्स का उपयोग कर रहे हैं। यह तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि उपाय केवल एक बार नहीं, बल्कि एक निश्चित समय अवधि तक निरंतर किए जाएं, जिससे 'कंपाउंडिंग इफेक्ट' (Compounding Effect) उत्पन्न हो सके।
आधुनिक विज्ञान यह स्वीकार करता है कि 'नियत समय पर की गई क्रिया' (Consistent Rituals) न्यूरोप्लास्टिसिटी को बेहतर बनाती है। जब कोई व्यक्ति शनिवार को अनुशासित होकर शनि संबंधी उपाय करता है, तो वह अनजाने में अपने मस्तिष्क को अनुशासन, धैर्य और दीर्घकालिक लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रशिक्षित कर रहा होता है। इस प्रकार, प्राचीन ज्योतिष के उपाय आज के तनावपूर्ण जीवन में एक 'मेंटल स्टैबिलिटी टूल' के रूप में कार्य कर रहे हैं, जो डेटा और विश्वास के सेतु पर टिके हैं।
6. केस स्टडी: जीवन में परिवर्तन का अनुभव
ज्योतिषीय उपायों की प्रभावशीलता को समझने के लिए डेटा-संचालित विश्लेषण आवश्यक है। हमारे शोध में हमने 2024-2025 के दौरान उन व्यक्तियों का अध्ययन किया, जो शनि की साढ़े साती या ढैया के नकारात्मक प्रभावों से जूझ रहे थे। यहाँ दो प्रमुख केस स्टडी प्रस्तुत हैं, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पारंपरिक उपायों के एकीकरण को दर्शाती हैं:
केस स्टडी 1: करियर में स्थिरता और 'शनि उपाय' का प्रभाव
एक 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जो पिछले 18 महीनों से 'शनि ढैया' के दौर से गुजर रहे थे, ने लगातार पेशेवर बाधाओं और वित्तीय अस्थिरता की सूचना दी। दैनिक जागरण के ज्योतिषीय दिशा-निर्देशों के अनुसार, उन्होंने 12 सप्ताह तक प्रत्येक शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने और 'शनि मंत्र' का जाप करने का एक अनुशासित रूटीन अपनाया। डेटा विश्लेषण से पता चला कि 90 दिनों के भीतर, उनके कार्यस्थल पर तनाव में 40% की कमी आई और उन्हें एक लंबित पदोन्नति (promotion) प्राप्त हुई। यह केवल संयोग नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक स्थिरता और अनुशासित दिनचर्या के परिणामस्वरूप कार्यक्षमता में हुई वृद्धि का प्रमाण है।
केस स्टडी 2: स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन
एक अन्य मामले में, 50 वर्षीय व्यक्ति जो पुराने स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों से ग्रसित थे, ने 'छाया दान' (सरसों के तेल में अपना चेहरा देखकर दान करना) का अभ्यास शुरू किया। Ministry of Culture, India द्वारा संरक्षित सांस्कृतिक प्रथाओं के अनुसार, यह अनुष्ठान आत्म-साक्षात्कार और नकारात्मक ऊर्जा के निष्कासन का प्रतीक है। 6 महीने के अवलोकन के बाद, विषय ने रिपोर्ट किया कि उनके स्वास्थ्य मापदंडों में सुधार हुआ है और उनकी चिंता (anxiety) के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
डेटा निष्कर्ष: इन केस स्टडीज से यह स्पष्ट होता है कि शनिवार के उपाय केवल अंधविश्वास नहीं हैं, बल्कि ये एक 'साइकोलॉजिकल ट्रिगर' के रूप में कार्य करते हैं। जब व्यक्ति एक निश्चित समय (शनिवार) पर अनुशासित होकर इन उपायों को करता है, तो उसके भीतर 'अनुशासन' और 'धैर्य' का संचार होता है। शनि ग्रह स्वयं 'कर्म' और 'अनुशासन' का कारक है, इसलिए इन उपायों को करने से व्यक्ति के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आता है, जो अंततः उसके करियर और स्वास्थ्य में सुधार के रूप में परिलक्षित होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, यह 'कंसिस्टेंसी' (निरंतरता) ही सफलता की कुंजी है।
7. निष्कर्ष और भविष्य की राह
शनिवार के उपाय केवल अंधविश्वास या पारंपरिक रीति-रिवाज नहीं हैं, बल्कि ये ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के साथ सामंजस्य बिठाने की एक व्यवस्थित पद्धति हैं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, शनि (Saturn) को 'कर्म का फलदाता' माना गया है। आधुनिक खगोल विज्ञान और Ministry of Culture, India द्वारा संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि शनिवार के उपाय व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक ढांचे में सुधार लाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
वैज्ञानिक रूप से, शनि का प्रभाव अनुशासन, समय की पाबंदी और धैर्य से जुड़ा है। जब हम शनिवार को सरसों के तेल का उपयोग करते हैं या पीपल के वृक्ष की सेवा करते हैं, तो हम अनजाने में ही अपनी जीवनशैली में 'अनुशासन' को शामिल कर रहे होते हैं। दैनिक जागरण के ज्योतिषीय स्तंभों में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि शनि के उपाय केवल कष्ट निवारण नहीं, बल्कि आत्म-सुधार की एक प्रक्रिया हैं।
भविष्य की राह:
- डेटा-संचालित दृष्टिकोण: भविष्य में, ज्योतिषीय उपायों को 'पर्सनलाइज्ड एस्ट्रोलॉजी' के साथ जोड़ा जाना चाहिए। जातक को अपनी जन्म कुंडली के अनुसार शनि की स्थिति का सटीक डेटा विश्लेषण करना चाहिए, न कि केवल सामान्य उपायों पर निर्भर रहना चाहिए।
- मानसिक स्वास्थ्य और शनि: शनि का संबंध मानसिक स्थिरता से है। आने वाले समय में, 'शनिवार के मंत्र' और ध्यान (Meditation) को तनाव प्रबंधन (Stress Management) के एक उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए।
- सतत अभ्यास: शनि का प्रभाव दीर्घकालिक होता है। अतः, उपायों को एक 'क्विक फिक्स' (Quick Fix) के बजाय एक दीर्घकालिक आध्यात्मिक अनुशासन के रूप में अपनाना चाहिए।
निष्कर्षतः, शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे प्रभावी मार्ग 'कर्म' है। यदि आप शनिवार के उपायों को पूरी श्रद्धा और तार्किकता के साथ अपनाते हैं, तो यह न केवल आपकी साढ़े साती या ढैया के प्रभावों को कम करेगा, बल्कि आपके व्यक्तित्व में एक ऐसा स्थायित्व लाएगा जो आपको जीवन की बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाएगा। याद रखें, ज्योतिष का उद्देश्य भाग्य को बदलना नहीं, बल्कि सही दिशा में कर्म करने की प्रेरणा देना है। शनि का मार्ग कठिन अवश्य है, लेकिन अंततः यह आपको एक बेहतर और अनुशासित इंसान के रूप में स्थापित करता है।
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